Pradhan Mantri Awas Yojana-PMAY/Indira Awas Yojana-IAY/Prime Minister Housing Scheme-PMHS Application/Eligibility/Selection/Loan Details: इंदिरा आवास योजना/प्रधानमंत्री आवास योजना मकानों का आवंटन/लाभार्थियों का चयन/लक्ष्य तथा उद्देश्य

  
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    IndianReaders Administrator Staff Member

    इंदिरा आवास योजना/प्रधानमंत्री आवास योजना
    (Pradhan Mantri Awas Yojana-PMAY/Indira Awas Yojana-IAY/Prime Minister Housing Scheme-PMHS)
    देश को आजादी मिलने के बाद किसी सरकार ने २५ साल तक गाँवो में आवास की समस्या को किसी ने गम्भीरतापूर्वक नहीं लिया। देश के विभाजन के बाद पुनर्वास मंत्रालय द्वारा शरणार्थियों के रहने के लिए एक आवास बनाया गया १९५७ में विकास आंदोलन जिसके तहत उत्तर भारत के बहुत से केंद्रों में ५ लाख परिवार बसाये गए। यह कार्यक्रम १९६० तक चला था।

    रहने के लिए आवास हर इंसान की मूलभूत आवश्यकता है। एक आम आदमी के लिए आवास मिलने पर उसकी अपनी सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा है। एक बेघर इंसान को आवास मिलने से उसके अस्तित्व में सामाजिक परिवर्तन आता है उसकी एक अपनी पहचान बनती है। इस आवास कार्यक्रम के तहत प्रतिव्यक्ति और सहकारी समितियों को ५०००/- रुपये का अधिकतम ऋण आवास के लिए दिया गया। इस योजना के तहत १९८० के अंत में ६७००० मकान बनाये गए थे।

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    साल १९७२ ७३ में लोकसभा ३७वीं रिपोर्ट में कहा गया था यह कहते हुए बहुत दुःख हो रहा है की भारत की ८३% जनता गाँवो में रहती है लेकिन ७३% मकान कच्चे हैं। सरकार ने आवास की समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद १९७४ में सरकार ने इसके लिए कई योजनाएं बनाई ओर कई आवास बनाये। १९८० में इंदिरा आवास योजना की उत्पत्ति हुई। १९८० रोजगार ग्रामीण योजना तथा राष्ट्रीय भूमिहीन रोजगार योजना के तहत कई मकान बनाये गए लेकिन राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रो में कोई आवसीय योजना नहीं थी। जून १९८५ में अनुसूचित जाती,अनुसूचित जनजाति तथा मुक्त बंधुआ मजदूरों के लिए मकान बनाने केंद्र के वित्तमंत्री ने रोजगार भूमिहीन योजना का एक हिस्सा अलग कर लिया।

    जिसके बाद १९८५ ८६ में इंदिरा आवास योजना की शुरुआत हुई जो १९८९ से शुरू हुए जवाहर रोजगार योजना के रूप में चलती रही। जवाहर योजना का ६% इंदिरा आवास योजना के लिए जाता था। साल १९९३ ९४ में इंदिरा आवास योजना को गरीबी रेखा से नीचे रहने अनुसूचित जाती तथा अनुसूचित जनजाति वाले लोगो के लिए बढ़ाकर १०% करदिया गया लेकिन बशर्ते गैर अनुसूचित जाती जनजाति पर जवाहर योजना का ४% से अधिक खर्च न हो। यह योजना गरीबो को मुफ्त आवास मुहैया करने के लिए बनाई गयी थी। वर्तमान में ग्रामीण परिवारों को मकान निर्माण के लिए ४५०००/- धनराशि दी जाती है।

    संकटग्रस्त क्षेत्रों में यह राशि ४८.५ हजार फिक्स की गयी है। योजना केवल गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले (बीपीएल) परिवारों के लिए है। धनराशि घर की किसी महिला के नाम पर ही निर्गत की जाती है। भारत निर्माण के अंतर्गत चल रही इंदिरा आवास योजना पर २0१0-११ में १०००० करोड़ रुपये की धनराशि आबंटित करायी गयी है।

    लक्ष्य तथा उद्देश्य इंदिरा आवास योजना/प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana-PMAY/Indira Awas Yojana-IAY/Prime Minister Housing Scheme-PMHS)
    इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी रेखा से निचे अनुसूची जाती ,अनुसूचित जनजाति तथा मुक्त बंधुवा मजदूरों को आवास यानि घर दिलाना तथा गैर अनुसूचित जाती के गरीब लोगों को आवास के लिए धन उपलब्ध करना था बशर्ते इसका आबंटन इंदिरा आवास योजना के ४०% से अधिक न हो। १९९५ में पूर्व शहीद सैनिकों तथा रक्षा कर्मचारियों की विधवा पत्नियों तथा सम्बन्धियों के लिए बिना किसी शर्तों के आय मापदंड पर विचार किया जैसे की वे ग्रामीण क्षेत्र में रहते थे।

    उनको किसी पुनर्वास योजना के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया। वे बेघर है आवासविहीन है। अन्य भूतपूर्व सैनिकों के सेवानिवृत सदस्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए यदि वे इंदिरा आवास योजना की सामान्य पात्रता की शर्तों को पूरा करती हैं तथा किसी अन्य पुनर्वास योजना के अंतर्गत शामिल नहीं किए गए हैं। भूतपूर्व सैनिकों और कर्मचारियों उनके आश्रितों को मकानों के आबंटन के संदर्भ में प्राथमिकता गैर-अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को आबंटन के लिए निर्धारित मकानों में से 40% ही दी जाएगी ।इस योजना का ३% विकलांगों लोगो के लिए निर्धारित किया गया है।

    लाभार्थियों का चयन इंदिरा आवास योजना/प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana-PMAY/Indira Awas Yojana-IAY/Prime Minister Housing Scheme-PMHS)
    जिला परिषद् द्वारा किये गए आबंटनों तथा लक्ष्यों के आधार पर इंदिरा आवास योजना के तहत बनाये जाने वाले मकानों की पंचायतवार संख्या निर्धारित करेगी तथा इसकी जानकारी ग्राम पंचायत को देगी। इसके बाद ग्राम पंचायत प्राथमिकता तथा योजना के निर्धारित दिशा निर्देशों के अनुसार लाभार्थी परिवार की सूची में से आबंटित लक्ष्यों तक लाभार्थियों का चयन करेंगी। लाभार्थियों के चयन में प्राथमिकता का क्रम:
    • मुक्त बंधुवा मजदूर।
    • अनुसूचित जाति/जनजाति परिवार।
    • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति परिवार, जिनकी मुखिया विधवाएँ तथा अविवाहित महिलाएं हैं।
    • अनुसूचित जाति/जनजाति परिवार, जो किसी आपदा जैसे बाढ़, आगजनी, भूकंप, चक्रवात से पीड़ित हैं।
    • अनुसूचित जाति/जनजाति के अन्य परिवार
    • गैर-अनुसूचित जाति/जनजाति परिवार।
    • शारीरिक रूप से अपंग(चाहे वो किसी भी वर्ग का विकलांग हो)।
    • युद्ध में मारे गए सुरक्षाकर्मियों तथा सैनिकों की विधवाएँ/परिवार।
    विकासात्मक परियोजनाओं के कारण विस्थापक हुए व्यक्ति, खानाबदोश, अर्ध खानाबदोश तथा निर्धिष्ट आदिवासी, और आन्तरिक शरणार्थी, (एक शर्त पर यदि ये परिवार गरीबी की रेखा से नीचे हों)।

    मकानों का आवंटन
    मुख्यतः मकानों का आवंटन लाभार्थी के परिवार के महिला सदस्य के नाम पर होना चाहिए लेकिन विकल्पानुसार इसे पति /पत्नी किसी के नाम पर भी आबंटित किया जा सकता है। इंदिरा आवास योजना के तहत माकन गांव के अपने निजी खंड में बनाया जाना चाहिए।(इसे छोटी बस्ती/समूह के रूप में भी बनाया जा सकता है) जिससे की उसके अंदर सड़क पेयजल जैसी सुविधाएँ भी मुहैया करायीं जा सके। इस योजना के तहत यह भी जरूर ध्यान दिया जाना चाहिए की मकान सुरक्षा क्षेत्र या कार्यस्थल के नजदीक न हो। इस योजना के अंतर्गत निर्माण सहायता की सीमा है -

    स्वच्छ शौचालय और धुवाँ रहित चूल्हा सहित मकान का निर्माण:
    • 17,500/- रू मैदानी क्षेत्र के लिए
    • 19,500/- रू. पहाड़ी/दुर्गम क्षेत्र के लिए
    ढाँचा और सामान्य सुविधाएँ प्रदान करने की लागत
    • 2,500/- रू.मैदानी क्षेत्र के लिए
    • 2.500/- रू.पहाड़ी/दुर्गम क्षेत्र के लिए
    कुल
    • 20.000/- रू.मैदानी क्षेत्र के लिए
    • 22.000/- रू.पहाड़ी/दुर्गम क्षेत्र के लिए
    इंदिरा आवास योजना के तहत कार्यान्वित अधिकारियों को नियमित रूप से जिले का दौरा करना चाहिए तथा समय समय पर इसकी सूचना देनी चाहिए। अधिकारियों को यह भी देखना चाहिए काम सही से चल रहा है या नही। जिला ब्लॉक के समय समय पर दौरे करने चाहिए तथा समस्त पहलुओं पर निगरानी करनी चाहिए।

    इंदिरा आवास योजना के अनुसार मकानों के निर्माण के कार्य किसी ठेकेदार को देने की अनुमति नही है तथा यह किसी सरकारी विभाग द्वारा भी नहीं बनाया जा सकता है यदि ऐसा कोई मामला सामने आता है तो सरकार के पास अधिकार है की वह उस राज्य का आबंटन रद्द करदे। लेकिन सरकारी विभागों से लाभार्थी तकनिकी सहायता ले सकतें है या फिर सीमेंट लोहा या ईंट जैसी कच्ची सामग्री की आपूर्ति की व्यवस्था कर सकतें है।

    मकानों का निर्माण किसी बहरी एजेंसी द्वारा भी नहीं किया जाना चाहिए। मकान केवल मकान के मूल स्वामी के द्वारा होना चाहिए। इस योजना के अनुसार मकान का कोई डिज़ाइन या ले आउट निर्धारित नहीं होना चाहिए। मकान का क्षेत्रफ़ल २० वर्गकिमी हो। मकान का मालिक अपनी इच्छा से मकान का डिज़ाइन तथा उपयुक्त स्थान, रसोई, वायु संचार, शौचालय सुविधाएँ, धुआंरहित चूल्हा जैसी चीज़ों को अपने हिसाब से बनवा सकता था।कार्यन्वित एजेंसियों के पास इंदिरा आवास योजना के तहत बनने वाले मकानों के निर्माण शुरू होने से लेकर पूरा बनने तक की तारीख,कुल लागत,मकानों की संख्या तथा पूरा गांव जिले की सूची होनी चाहिए।

    इस योजना के तहत बनने वाले मकानों के बाहर प्रतीक चिन्ह लाभार्थी का नाम तथा निर्माण के वर्ष का बोर्ड लगा होना चाहिए।

     
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    munish 8938897029
     
    Last edited by a moderator: Dec 13, 2016
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