मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना: Mukhy Mantri Bbhiksha Vruti Nivaran Yojna Applying Process & Eligibility

  
  1. RAM KASTURE

    RAM KASTURE Member

    मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना
    अपने देश में अब भिखमंगेपन ने एक सुव्यवस्थित व्यवसाय का रूप धारण कर लिया है. पिछली राष्ट्रीय जनगणना के अनुसार हमारे देश में 56 लाख व्यक्ति भिक्षा मांगने का व्यवसाय कर अपनी आजीविका चला रहे हैं. इसमें असमर्थ एवं अधर्मों की संख्या एक लाख से भी कम है, सभी इस योग्य है कि अपनी आजीविका अपने श्रम द्वारा उपार्जित कर सकें, किन्तु वे करते नहीं. बड़े शहरो में इस व्यवसाय को अनेक गिरोह संचालित कर रहे है. जो बच्चो से बलात यह व्यवसाय कराया जा रहा है. पंडित श्री राम शर्मा आचार्य.
    देश में बेरोजगारी और अपंगता के कारण अनेक लोग अपना जीवनयापन करने की स्थिति में नहीं है. इनका देखभाल करने वाला भी कोई नहीं है, इस कारण इन लोगो के सामने भिक्षा मांगने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है. मंदिरों, गिरिजाघरो, गुरुद्वारों और मस्जिदों के पास ये लोग भिक्षा मांगने का कार्य करते है. हमारे देश में ऐसे लोगो की मदद करना धर्म आधारित कार्य माना जाता है किन्तु साक्षरता बढ़ने के कारण लोगो की भिक्षा देने की प्रवर्ती कम होते जा रही है और ऐसा कार्य करने वालो को हेय दृष्टी से देखा जाता है, अनेको बार तो इन्हें बुरी तरह से प्रतारित भी किया जाता है. बिहार सरकार ने इनकी वेदना को समझा और इनको इस काम से मुक्त कर इनके पुनर्वास का संकल्प लिया है. बाकायदा इनके लिए योजना और योजना के आधारभूत ढाचा भी तैयार किया गया है.
    The unemployment and disability are the cause for begging. The poor’s can’t manage the food for the living. The begging is only the alternative with these peoples. These people will meet near the Temples, Churches, and Mosques & Gurudwara. As per the dharma said to help these people, due to literacy this work is not acceptable to the majority of the peoples, they ignore the baggers and not behaved properly. The government of Bihar takes it seriously and a scheme has launched for the baggers. The main object of the scheme is
    1. Provide the medicine & treatment to the peoples.
    2. Rehabilitee the people in the good atmosphere and arranges training for the peoples so that they can get the job.
    मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना का मुख्य उद्देश्य है बिहार राज्य में भिक्षावृत्ति की कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना और इस कार्य में लगे लोगो का पुनर्वास करना है. इस योजना के अंतर्गत
    In the scheme
    1. इस हेतु स्थापित संचालनालय निराश्रितों और विशेषकर वृद्धजनों के पुनर्वास के लिए चिकित्सा और अन्य सुविधाओं के साथ आश्रय गृह स्थापित करता है.
    Established the directorate for rehabilitation of baggers, the priority will given to shelter less and aged people.
    2. यह योजना युवा भिक्षावृत्ति करने वालों का पुनर्वास भी करती है. पटना में प्राथमिकता के आधार पर पहला कदम रखने के बाद अब इन कार्यकलापों का चरणबद्ध तरीके से सभी संभागो और जिला मुख्यालयों में विस्तार किये जाने की योजना है.
    The scheme rehabilitee the baggers, the scheme are started in Patna, for benefits of the scheme identify the baggers, the scheme will extend to all the division and the district of the state.
    योजना की स्थिति:
    इस योजना का कार्यान्वयन पटना ज़िले में किया जा रहा है जिसके अंतर्गत पुनर्वास के लिए 1,680 भिक्षावृति लगे लोगो को चिन्हित किया गया है. इस योजना को पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जा रहा है, शैने: शैने: इस योजना को प्रदेश के सभी क्षेत्रो में प्रारंभ किये जाने का योजना में प्रावधान है.
    The execution of the scheme has started in Patna & 1680 baggers identify for the scheme. This is the pilot project of the scheme, after seeing the result the scheme will be extended to all parts of the state.
    इस योजना के लाभ और पात्रता
    (i) इस योजना का उद्देश्य भिक्षावृत्ति करने वालों को भिक्षावृत्ति से अलग करना और उनका पुनर्वास करना है.
    The main object of the scheme is to prevent the bagging in the state. The baggers will rehabilitee by the scheme.
    (ii) अति गरीब व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए स्टेट सोसाइटी फॉर रीहैबीलिटेशन ऑफ़ अल्ट्रा पूअर की स्थापना की गई है.
    For the rehabilitation of the poorest the state society for rehabilitation of ultra, poor is established in the state.
    (iii) अति गरीब लोगों में निःशक्त व्यक्ति व भिखारी आते हैं.
    The beneficiaries of the scheme will be poorest and disable person.
    (iv) वर्तमान समय में संयुक्त निदेशक, सामाजिक सुरक्षा और निःशक्तता परियोजना अधिकारी, परियोजना सेल की भूमिका निभाएंगे स्टेट सोसाइटी फॉर रीहैबीलिटेशन ऑफ़ अल्ट्रा पूअर के अन्य पदों के लिए विज्ञापन निकाल कर कुल पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की गयी है.
    At present the Joint Director social security’s will responsible to execute the scheme. The appointments of staff on contract basis are made for society for rehabilitation of ultra poor.
    इसके साथ गैर सरकारी संस्था 'मेधा' का चुनाव भी कर लिया गया है, यह संस्था भिखारियों का सर्वेक्षण करेगी. जिला स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी अंत में भिखारियों के नामों का चुनाव करेगी. इस कमेटी के सदस्य गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, निःशक्त क्यक्ति व ज़िला मजिस्ट्रेट होंगे. पुनर्वास के लिए एक त्रिस्तरीय मॉडल निर्धारित किया गया है. इस माडल में सुझाव और पुनर्वास, कौशल विकास और स्वरोज़गार के अवसर को शामिल किया गया है.
    The MEDHA NGO is selected for the survey of the baggers. A committee established for the selection of the beneficiaries. The committee will consist of the representatives of the non organization institute; disable persons and the district magistrate.
    इस योजना की सदस्यता कैसे प्राप्त करें
    इस योजना का कार्यान्वयन करने के उद्देश्य से 'अत्यंत निर्धनों के पुनर्वास हेतु बिहार राज्य सोसाइटी' का पंजीकरण किया गया है. भिक्षावृत्ति करने वालों और 'अत्यंत निर्धनों' या निराश्रितों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच और चिकित्सीय सहायता के लिए पटना में एक अस्पताल को नोडल अस्पताल के रूप में चिन्हित किया गया है. भिक्षावृत्ति करने वालों के पुनर्वास की प्रक्रिया में साझेदारी हेतु गैर-सरकारी संस्थाओं को चिन्हित किया गया है. इन संस्थाओ की भिक्षुको के पुनर्वास में सहायता ली जाएगी.
    To execute the scheme a society (Bihar state society for the rehabilitation of poorest, shelter less peoples.) is registered. The society will provide the medical examination medicine free of cost.
    अब गरीबो के बारे में भी जान ले:
    आखिर हैं ये भिक्षा मांगने वाले लोगो की आर्थिक अवस्था के बारे में अध्ययन किया गया और इन्हें 6 वर्गों में बाटा गया,
    1. पहली श्रेणी उन लोगों की है जो गंभीर शारीरिक अस्वस्थता, असाध्य रोगों, विकलांगता के साथ ही गरीबी से पीड़ित हैं और जीवित रहने के लिए उनके पास कोई और कोई विकल्प नहीं है.
    2. दूसरी श्रेणी में वे बूढ़े और असहाय लोग हैं, जिन्‍हें परिवारों से निकाल दिया गया है. इनके पास न रहने का कोई इंतजाम है और नाही खाने की कोई व्यवस्था की गयी है.
    3. तीसरी श्रेणी में ऐसे बेरोजगार शामिल हैं, जो पूरी तरह निराश हो चुके हैं और जिनके पास आय का कोई अन्य साधन नहीं है.ये बेरोजगार जीवन से निराश हो चुकने के कारण कोई काम करने की स्थिति में नहीं है.
    4. चौथी श्रेणी में भिक्षावृत्ति करने वाले ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने इसे अपना धंधा बना रखा है और बिना कुछ और किए, इसे ही अपनी कमाई का साधन मानते है. ऐसे लोग दया के पात्र नहीं ये लखपति गरीब है. एक समाचार पत्र में पढ़ा था कि ऐसे भी गरीब है जो भिक्षा मांगकर इससे मिली राशी ब्याज पर देते है.
    5. पांचवी श्रेणी में ठगी करके, पैसा इकट्ठा करने की कोशिश करने वाले लोग हैं. भिक्षा के माध्यम से ठगी या चोरी के ठिकानो का पता लगाकर इन स्थानों पर चोरी करते है.
    6. और छठी श्रेणी में असामाजिक तत्वों के चंगुल में फंसे ऐसे लोग हैं, जिनसे अलग-अलग स्थानों पर, नियंत्रित ढंग से भीख मंगवाई जाती है और अपराधी तत्व, उस भीख का बहुत थोड़ा हिस्सा, उन भीख मांगने वालों को दे देते हैं. यह एक बड़ा गिरोह है जो देश के सभी स्थानों पर काम कर रहा है.
    बिहार सरकार ने गंभीरता से व्यावहारिक कदम उठाए और भिक्षावृत्ति को राज्य से समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है इससे सामाजिक बदलाव आएगा और बिहार में में सार्वजनिक स्थानों पर, हाथ फैलाए हुए खड़े लोगों की समस्या भी हल की जाएगी , इस दिशा में कदम उठाए कर बिहार सरकार ने अपने सामाजिक दायित्व को निभाया है.
    As per the study, the baggers has divided into six groups
    1. The baggers having disability, disease not curable, physical illness & living poorest life comes in the category.
    2. The old having no shelter, the family left, they have no house and arrangements of foods, comes in the category.
    3. The unemployed not getting the job becomes hopeless to the system, hence can’t do any works can place in the category.
    4. Some baggers make bagging as profession, & doing the business by the bagging., These baggers are a lot of amount with them they giving it as a loan to the persons & taking interest on it. They are rich baggers.
    5. By bagging, they search the places for theft & in night they makes theft incident,
    6. Some baggers doing bagging by force. Such groups are active in the society. They kept low age boys and force them for bagging.
    The bagging is shameful for the society. The Bihar government launched the scheme for their welfare. It’s a good for baggers.

    बिहार राज्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना

    बिहार राज्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के अन्तर्गत 60 से 64 वर्ष आयु के वैसे गरीब परिवार के व्यक्ति जिनकी आय शहरी क्षेत्रों में रु. 5500/- वार्षिक एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रु. 5000/- वार्षिक से कम हो को रु. 300/- प्रति माह प्रति पेंशनधारी की दर से पेंशन दिया जाता है। बंधुआ मजदूर के मामले में आय एवं उम्र की सीमा लागू नहीं है।
    In the Bihar state, the social security pension scheme has launched in the scheme the age persons should be 60 to 64 years. To get the pension the annual income in the urban area should be Rs. 5500 & Rs.5000 in rural areas.
    इस योजना का कार्यान्वयन वर्ष 1974 से किया जा रहा है. The scheme is executed from 1974.
    लाभ और पात्रता
    इस योजना के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को प्रतिमाह 200 रु. की राशि प्रदान की जाती है। आवेदक की आयु 60 से 64 वर्ष के बीच होनी चाहिए, वह निर्धनता रेखा से नीचे के परिवार का होना चाहिए और आईजीएनओएपीएस का लाभार्थी नहीं होना चाहिए। आवेदक की अधिकतम वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र के मामले में 5,000/- रु. और शहरी क्षेत्र के मामलों में 5,500/- रु. तक होनी चाहिए In the scheme Rs 200 is provided to the eligible beneficiaries. The eligibility is given below:
    1. Age should be 60 to 64 years.
    2. The person has live in the below poverty line.
    3. The annual income should be Rs. 5500 in the urban area & 5000 in rural area.
    कैसे प्राप्त करें
    लाभार्थियों की पहचान मुखिया और पंचायत सचिव द्वारा की जाती है। ग्राम सभा भी लाभार्थियों की सिफ़ारिश कर सकती है। पेंशन का संवितरण पेंशनभोगी के पोस्ट ऑफिस बचत खाते के माध्यम से किया जाता है।
    The beneficiaries will identify by the head & secretary of the Panchayat. The Gramsabha passed the resolution on the recommendation of the Sarpanch & secretary.
    For the getting the pension has to apply in the Municipal Body in urban area & village panchayat in rural area.
    सामाजिक सुरक्षा पेंशन अतिगरीब लोगो को उनके जीवन यापन के लिए दी जाती है, यह सही है कि इस पेंशन की राशी इतनी कम है कि इससे माह भर तक भोजन करना संभव नहीं है, इसीलिए इन बुजुर्गो को इसके लिए अलग से कोई काम करना पड़ता है. अनेक राज्यों में इस पेंशन के साथ 1 किलो गेहू या 1 किलो चावल भी दिया जाता है. चावल और गेहू से भोजन किया जा सकता है और पेंशन की राशी से भोजन के सामान लाने की व्यवस्था की जा सकती है. इसके बाद भी इनका जीवन अधुरा रहता है जिसे पूरा करने के लिए इसके उसके सामने हाथ फैलाना पड़ता है. कपडे लत्तो की व्यवस्था इसमें शामिल है. इन लोगो को कोई छोटा मोटा काम करने की आदत डालनी चाहिए. इससे यह लोग सरकार के अनुदान और अपनी मेहनत से एक अच्छा जीवन जी सकते है.
     
    Jisan Uddib likes this.
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    please check the details of this yojana.
     
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